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राजनाथ सिंह ने ADMM-Plus में कहा – “भारत का इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण दीर्घकालिक, समावेशी और सिद्धांत आधारित”

PNS Bureau;- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 12वें एडीएमएम-प्लस (ADMM-Plus) सम्मेलन में कहा कि भारत का कानून के शासन (Rule of Law), विशेषकर संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के प्रति जोर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौवहन व उड़ान की स्वतंत्रता की वकालत किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के साझा हितों की रक्षा के लिए है।

उन्होंने कहा कि भारत की आसियान (ASEAN) के साथ रणनीतिक साझेदारी लेन-देन आधारित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और सिद्धांत-आधारित है। भारत मानता है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र खुला, समावेशी और दबाव-मुक्त रहना चाहिए।

मलेशिया की अध्यक्षता में “समावेशिता और स्थिरता” पर बल को समयानुकूल बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सुरक्षा में समावेशिता का अर्थ है—हर देश को, उसके आकार या क्षमता की परवाह किए बिना, क्षेत्रीय व्यवस्था के निर्माण में समान भूमिका मिले। स्थिरता का मतलब है—दीर्घकालिक सहयोग और लचीली सुरक्षा संरचनाएं, जो नई चुनौतियों के प्रति सक्षम हों।

उन्होंने कहा कि भारत का सुरक्षा दृष्टिकोण रक्षा सहयोग, आर्थिक विकास, तकनीकी साझेदारी और मानव संसाधन उन्नयन को जोड़ता है—यही “महासागर (MAHASAGAR)” की भावना है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत 2010 से एडीएमएम-प्लस का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है, और उसने माइन एक्शन, सैन्य चिकित्सा, आपदा राहत और वर्तमान में आतंकवाद-रोधी कार्य समूहों का सह-अध्यक्षत्व किया है।

उन्होंने कहा कि भारत संवाद, साझेदारी और सामूहिक सुरक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए काम करता रहेगा।(PIB)


 

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